भूतकाल के मूल रूप
भूतकाल बीती हुई क्रिया या अवस्था बताता है। हिंदी में पूर्ण भूत, अपूर्ण भूत और आदतन भूत के मूल रूप अलग-अलग अर्थ देते हैं।
- मैंने खाना खाया।
- वह सो रहा था।
- हम बचपन में यहाँ रहते थे।
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भूतकाल बीती हुई क्रिया या अवस्था बताता है। हिंदी में पूर्ण भूत, अपूर्ण भूत और आदतन भूत के मूल रूप अलग-अलग अर्थ देते हैं।
भविष्यत् काल आने वाली क्रिया या अनुमान बताता है। क्रिया के साथ -गा, -गी, -गे कर्ता के लिंग, वचन और सम्मान के अनुसार जुड़ते हैं।
'नहीं' सामान्य नकार के लिए प्रयोग होता है, जबकि 'मत' आज्ञा या सलाह में किसी काम को रोकने के लिए आता है। दोनों का प्रयोग संदर्भ के अनुसार अलग है।
ध्यान दें: आज्ञा में 'नहीं जाओ' की जगह सामान्यतः 'मत जाओ' अधिक स्वाभाविक है।
हाँ/नहीं वाले प्रश्नों में स्वर, प्रसंग या 'क्या' से प्रश्न बनता है। उत्तर सामान्यतः हाँ/नहीं के साथ वाक्य या क्रिया दोहराकर दिया जाता है।
वाक्य की शुरुआत में 'क्या' लगाने से पूरा वाक्य हाँ/नहीं प्रश्न बनता है। वाक्य के भीतर 'क्या' वस्तु या सूचना पूछने के लिए भी आ सकता है।
ध्यान दें: 'क्या' की जगह से अर्थ बदल सकता है: 'क्या तुम पढ़ रहे हो?' = yes/no; 'तुम क्या पढ़ रहे हो?' = what।
आज्ञार्थक रूप आदेश, अनुरोध, निर्देश या सलाह देने के लिए प्रयोग होता है। हिंदी में संबंध और सम्मान के अनुसार रूप बदलते हैं: कर, करो, कीजिए।
विनम्रता दिखाने के लिए 'कृपया', 'ज़रा', 'कीजिए' और 'चाहिए' जैसे रूप प्रयोग किए जाते हैं। ये वाक्य को आदेश से अनुरोध में बदल देते हैं।
'चाहिए' आवश्यकता, सलाह या उचितता दिखाता है। इसके साथ अनुभवकर्ता प्रायः 'को' रूप में आता है: मुझे, तुम्हें, उसे।
ध्यान दें: 'मैं जाना चाहिए' गलत है; सही संरचना है 'मुझे जाना चाहिए।'
'सकना' क्षमता, अनुमति या संभावना बताता है। मुख्य क्रिया सामान्यतः क्रिया-मूल / stem रूप में आती है और 'सकना' काल/लिंग/वचन के अनुसार बदलता है।
'चाहना' इच्छा या चाह व्यक्त करता है। इसके बाद संज्ञा या क्रिया + ना रूप आ सकता है।
पसंद और अनुभव बताने के लिए हिंदी में अक्सर दत्तिव संरचना आती है: मुझे, तुम्हें, उसे। वस्तु के अनुसार क्रिया-सहमति बदल सकती है।
संयुक्त क्रिया में मुख्य क्रिया के साथ दूसरी हल्की/वेक्टर क्रिया जुड़ती है, जैसे लेना, देना, जाना। इससे क्रिया में पूर्णता, लाभ, अचानकपन या भाव जुड़ता है।
क्रिया का -ना रूप infinitive या verbal noun की तरह काम करता है। यह इच्छा, आवश्यकता, उद्देश्य और सामान्य क्रिया-नाम बताने में उपयोगी है।
क्रिया + कर किसी क्रिया को पहले पूरा करके दूसरी क्रिया करने का अर्थ देता है। यह क्रमबद्ध क्रियाओं को छोटे और स्वाभाविक ढंग से जोड़ता है।
संयोजक शब्द वाक्यों और विचारों को जोड़ते हैं। 'और' जोड़ता है, 'लेकिन' विरोध दिखाता है, 'या' विकल्प देता है, 'क्योंकि' कारण और 'इसलिए' परिणाम बताता है।
क्रियाविशेषण बताते हैं कि क्रिया कब, कहाँ, कैसे या किस दिशा में हुई। हिंदी में ये अक्सर क्रिया से पहले आते हैं, पर ज़ोर के अनुसार स्थान बदल सकता है।
द्विभाषी लघु कहानियां पढ़ें और इन संरचनाओं को असली वाक्यों में देखें।