कारक यह दिखाता है कि संज्ञा या सर्वनाम वाक्य में क्या भूमिका निभा रहा है: कर्ता, कर्म, संबंध, करण, अपादान आदि। हिंदी में कारक अक्सर परसर्गों के माध्यम से व्यक्त होते हैं।
राम ने फल खाया।
मैंने सीता को पत्र लिखा।
वह दिल्ली से आया।
परसर्गों के साथ तिर्यक रूप
जब संज्ञा या सर्वनाम के बाद परसर्ग आता है, तो कई शब्द तिर्यक रूप लेते हैं। यह हिंदी की परसर्गीय संरचना का बहुत महत्त्वपूर्ण भाग है।
लड़का → लड़के को
लड़की → लड़की से
कमरा → कमरे में
ध्यान दें: 'लड़का को' की जगह सामान्य रूप 'लड़के को' है।
एर्गेटिव चिह्न ने
'ने' पूर्ण भूतकाल में कई सकर्मक क्रियाओं के कर्ता के साथ आता है। इससे वाक्य में क्रिया-सहमति अक्सर कर्म के साथ जुड़ जाती है।
राम ने खाना खाया।
सीमा ने किताब पढ़ी।
बच्चों ने आम खाए।
ने के साथ क्रिया-सहमति
'ने' वाले वाक्यों में यदि कर्म पर 'को' नहीं है, तो क्रिया सामान्यतः कर्म के लिंग-वचन से सहमत होती है। यदि कर्म चिह्नित है, तो क्रिया अक्सर डिफ़ॉल्ट पुल्लिंग एकवचन रूप में रहती है।
सीमा ने किताब पढ़ी।
सीमा ने राम को देखा।
मैंने चिट्ठियाँ लिखीं।
ध्यान दें: 'सीमा ने किताब पढ़ा' सामान्य मानक हिंदी में गलत है; 'किताब' स्त्रीलिंग है, इसलिए 'पढ़ी' आएगा।
को चिह्नित कर्ता और अनुभवकर्ता
कई अनुभव, ज्ञान, पसंद, आवश्यकता और भावना वाले वाक्यों में अनुभवकर्ता 'को' रूप में आता है। इस संरचना में अर्थ का कर्ता व्याकरणिक रूप से सामान्य कर्ता जैसा नहीं होता।
मुझे हिंदी आती है।
उसे डर लग रहा है।
बच्चों को भूख लगी है।
दत्तिव संरचनाएँ: मुझे ठंड लग रही है, मुझे जाना है
दत्तिव संरचनाओं में अनुभवकर्ता 'मुझे/तुम्हें/उसे/हमें' जैसे रूप में आता है। ये शारीरिक अनुभव, बाध्यता, आवश्यकता और योग्यता व्यक्त करने में बहुत आम हैं।
मुझे ठंड लग रही है।
हमें जल्दी जाना है।
उसे यह बात समझ में आई।
सकर्मक और अकर्मक क्रियाएँ
सकर्मक क्रिया को कर्म चाहिए, जबकि अकर्मक क्रिया बिना कर्म के पूर्ण अर्थ दे सकती है। 'ने', passive और causative समझने के लिए यह भेद आवश्यक है।
उसने दरवाज़ा खोला।
दरवाज़ा खुला।
बच्चा सो गया।
वर्तमान, भूत और भविष्य काल की तुलना
काल बताता है कि क्रिया कब होती है: अभी, पहले या बाद में। हिंदी में काल के साथ पक्ष और सहायक क्रिया मिलकर पूरा अर्थ बनाते हैं।
मैं पढ़ता हूँ।
मैंने पढ़ा।
मैं पढ़ूँगा।
पूर्ण पक्ष: किया है, किया था
पूर्ण पक्ष क्रिया के पूरा हो जाने या परिणाम पर ज़ोर देता है। वर्तमान पूर्ण का संबंध वर्तमान से और भूत पूर्ण का संबंध किसी पहले के भूतकालीन बिंदु से होता है।
मैंने काम किया है।
उसने खाना खाया था।
हम पहले ही पहुँच चुके थे।
अपूर्ण पक्ष: कर रहा है, कर रहा था
अपूर्ण या प्रगतिशील पक्ष बताता है कि क्रिया किसी समय चल रही थी या चल रही है। इसमें रहा/रही/रहे + होना का प्रयोग होता है।
वह पढ़ रहा है।
मैं सो रहा था।
वे बात कर रहे थे।
आदतन पक्ष: करता है, करता था
आदतन पक्ष नियमित क्रिया, आदत या सामान्य स्थिति बताता है। वर्तमान और भूत दोनों में यह किसी दोहराई जाने वाली क्रिया को दिखा सकता है।
वह रोज़ दौड़ता है।
मैं बचपन में जल्दी उठता था।
वे रविवार को बाज़ार जाते हैं।
संभाव्य और शर्तीय रूप
संभाव्य और शर्तीय रूप संभावना, इच्छा, विनम्रता या काल्पनिक स्थिति बताते हैं। हिंदी में क्रिया-रूप और अगर/यदि जैसे शब्द मिलकर यह अर्थ बनाते हैं।
वह आ सकता है।
अगर समय मिला तो मैं आऊँगा।
काश मैं वहाँ जा पाता।
चाहिए, पड़ना, होना, सकना, पाना के अर्थगत अंतर
ये क्रियाएँ आवश्यकता, बाध्यता, क्षमता, संभावना और सफलतापूर्वक कर पाने के अलग-अलग अर्थ देती हैं। इनके सूक्ष्म अंतर से वाक्य का भाव बदल जाता है।
मुझे जाना चाहिए।
मुझे जाना पड़ा।
मैं यह काम कर पाया।
संयुक्त क्रियाएँ: कर देना, कर लेना, कर जाना, रो/हँस पड़ना
संयुक्त क्रियाएँ मुख्य क्रिया में दृष्टिकोण या भाव जोड़ती हैं। देना अक्सर दूसरे के लिए/बाहर की ओर, लेना अपने लाभ/पूरा कर लेने, जाना पूर्णता या अनायासता और पड़ना अचानक बाध्यता दिखा सकता है।
मैंने पत्र लिख दिया।
उसने काम कर लिया।
वह रो पड़ा।
वेक्टर क्रियाएँ और उनके भावात्मक अर्थ
वेक्टर क्रिया मुख्य अर्थ नहीं, बल्कि क्रिया की पूर्णता, दिशा, भाव, अचानकपन या वक्ता का दृष्टिकोण जोड़ती है। इन्हें अलग-अलग शब्दों की तरह नहीं, संयोजन के रूप में सीखना बेहतर है।
खा लेना
दे देना
बैठ जाना
उठ पड़ना
ध्यान दें: हर जगह संयुक्त क्रिया लगाने से वाक्य स्वाभाविक नहीं बनता; 'मैंने पानी पी लिया' सही है, पर हर संदर्भ में 'पी लिया' और 'पिया' एक जैसे नहीं हैं।
प्रेरणार्थक क्रिया / causative: कराना, दिखाना, खिलाना
प्रेरणार्थक क्रिया बताती है कि कर्ता स्वयं काम नहीं करता, बल्कि किसी से काम करवाता है या किसी को क्रिया कराता है। हिंदी में कई क्रियाओं के causative रूप नियमित ढंग से बनते हैं।
मैंने दरज़ी से कपड़े सिलवाए।
माँ ने बच्चे को खाना खिलाया।
शिक्षक ने उत्तर दिखाया।
द्वितीय causative रूप
द्वितीय causative में करवाने की दूरी या मध्यस्थता और बढ़ जाती है। इसमें कर्ता किसी से किसी और के माध्यम से काम करवा सकता है।
मैंने मकान बनवाया।
उसने गाड़ी धुलवाई।
अधिकारी ने रिपोर्ट लिखवाई।
कर्मवाच्य / passive: किया गया
कर्मवाच्य में ध्यान कर्ता से हटकर कर्म या क्रिया पर जाता है। सामान्य रूप है: क्रिया का पूर्ण रूप + जाना, जैसे किया गया, लिखा गया, खोला गया।